Bhagavat Gita (भागवद गीता) : गीता के अठारहवाँ अध्याय के श्लोक 51 से 60 तक का गहन विश्लेषण
Bhagavat Gita : अठारहवाँ अध्याय (मोक्ष संन्यास योग) – श्लोक 51 से 60: ब्रह्म की प्राप्ति, परा भक्ति और प्रकृति का बंधन अठारहवें अध्याय के पहले हिस्सों (श्लोक 49-50) में, भगवान कृष्ण ने बताया कि नैष्कर्म्य सिद्धि (कर्म के फलों से मुक्ति) पाने के बाद कोई ब्रह्म को कैसे पाता है, और अब वे इसे … Read more