Mahatmya of Kartik month : कार्तिक मास का महात्म्य, कथा, नियम एवं पूजा अनुष्ठान

विवरण:

Mahatmya of Kartik month : हिंदू धर्म में कार्तिक माह का विशेष महत्व है। विक्रम संवत के अनुसार यह आठवाँ महीना है और दिवाली के बाद शुरू होता है। यह महीना भगवान विष्णु, देवी लक्ष्मी, तुलसी और शिव की पूजा के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों में इस महीने को ‘धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष’ प्रदान करने वाला बताया गया है, इसीलिए इस महीने को सर्वश्रेष्ठ महीना कहा जाता है। इस महीने में किए गए स्नान, दान, तप और पूजा का फल सहस्त्र गुना बढ़ जाता है और सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।

कार्तिक माह का धार्मिक एवं पौराणिक महत्व:

Kartik month : के महत्व से जुड़ी कई कहानियाँ हैं, जो इस माह की पवित्रता और महिमा को दर्शाती हैं:

1.भगवान विष्णु का निवास और तुलसी पूजा:

Kartik month : मान्यता के अनुसार, चातुर्मास के चार महीनों के दौरान भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं। देवउठी एकादशी के दिन भगवान विष्णु योग निद्रा से जागते हैं और इसी दिन से कार्तिक मास की शुरुआत होती है। इसलिए इस माह में भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है। इस माह में तुलसी पूजन आवश्यक माना गया है। तुलसी को भगवान विष्णु की ‘प्रिय’ माना जाता है और कहा जाता है कि इस माह में तुलसी के पौधे की पूजा करने और दीपक जलाने से स्वयं लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। इसी माह में तुलसी विवाह भी मनाया जाता है, जो भगवान विष्णु के स्वरूप शालिग्राम और माता तुलसी के विवाह का प्रतीक है।

2.कृष्ण और गोपियों की कहानी (दामोदर लीला):

Kartik month : की कथा स्कंद पुराण के वैष्णव खंड में वर्णित है। इस माह को ‘दामोदर मास’ भी कहा जाता है क्योंकि इसी माह में श्री कृष्ण की ‘दामोदर लीला’ हुई थी। बालक कृष्ण की नटखट हरकतों से परेशान होकर माता यशोदा ने उन्हें खल से बाँध दिया था। ‘दाम’ का अर्थ रस्सी और ‘उदर’ का अर्थ पेट होता है, इसलिए कृष्ण को ‘दामोदर’ कहा गया। कार्तिक मास में भगवान दामोदर की पूजा करने से भक्तों को पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

3.शिव द्वारा त्रिपुरासुर का वध:

Kartik month : की पूर्णिमा के दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक शक्तिशाली राक्षस का वध किया था। इस राक्षस के वध की खुशी में देवताओं ने दीपोत्सव मनाया था, इसलिए इस दिन को ‘देव दिवाली’ के नाम से भी जाना जाता है। इसी कारण इस माह में शिवलिंग पर जलाभिषेक और पूजा का भी विशेष महत्व है।

कार्तिक माह के मुख्य नियम (व्रत एवं आचरण):

Kartik month : में धर्म और संयम का जीवन व्यतीत करना चाहिए। कुछ मुख्य नियमों का पालन करना चाहिए:

1.कार्तिक स्नान एवं शुद्धि:

सूर्योदय से पहले स्नान: इस महीने में सूर्योदय से पहले उठकर किसी नदी, सरोवर या पवित्र जल में स्नान करने का विशेष महत्व है। यदि बाहर जाना संभव न हो, तो घर के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। मान्यता है कि इस महीने में देवी-देवता नदियों में स्नान करने पृथ्वी पर आते हैं।

ब्रह्मचर्य का पालन करें: Kartik month में शारीरिक और मानसिक पवित्रता बनाए रखनी चाहिए।

भूमि पर शयन: तन और मन को सात्विकता प्रदान करने के लिए इस महीने में भूमि पर बिछौना बिछाकर शयन करने को कहा गया है।

2.आहार नियम (भोजन):

एक समय भोजन: इस माह में व्रती को केवल एक समय हविष्य (सात्विक भोजन) ग्रहण करना चाहिए।

संयमित आहार: Kartik month में दाल, बैंगन, कद्दू, मसूर, मांस, मछली, शराब आदि व्यसनों से दूर रहें। लहसुन, प्याज जैसे तामसिक भोजन से भी परहेज करें।

मीठी वाणी: इस माह में क्रोध, लोभ, मोह का त्याग करें और मीठी वाणी बोलें। किसी की निंदा या अपमान न करें।

3.दान और पुण्य:

दीपदान: इस माह का सबसे बड़ा पुण्य ‘दीपदान’ है। मंदिर में, तुलसी के पौधे के पास, नदी के किनारे, पीपल के पेड़ के नीचे और घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाने से लक्ष्मीजी की कृपा प्राप्त होती है।

दान: अन्न, वस्त्र और धन का दान करना बहुत शुभ माना जाता है।

4.तुलसी की पूजा:

प्रातःकालीन पूजन: प्रतिदिन प्रातः स्नान के बाद तुलसी के पौधे पर जल चढ़ाएँ, घी का दीपक जलाएँ और परिक्रमा करें।

तुलसी के पत्ते: Kartik month में भगवान विष्णु को तुलसी के पत्ते चढ़ाने से दोगुना फल मिलता है। रविवार और एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते न तोड़ें।

कार्तिक माह की पूजा विधि:

Kartik month : में प्रतिदिन निम्नलिखित पूजा करनी चाहिए:

1. उद्घाटन समारोह (सुबह):

सूर्योदय से पहले स्नान करें और साफ़ कपड़े पहनें।

पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।

भगवान को जल, दूध और पंचामृत से स्नान कराएँ और नए वस्त्र अर्पित करें।

2. पूजा और मंत्र जाप:

तुलसी पूजा: तुलसी के पौधे पर जल चढ़ाएँ और हल्दी, कंकू, चावल और फूल चढ़ाएँ। शाम को घी का दीपक जलाएँ।

दीपदान: घर और मंदिर में दीपदान करें।

मंत्र जाप: भगवान विष्णु के मंत्र ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ या श्रीकृष्ण के मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।

कथा श्रवण: प्रतिदिन Kartik month की कथा पढ़ें या सुनें।

3. विशेष पूजा:

शालिग्राम पूजा: भगवान विष्णु के शालिग्राम रूप की पूजा करने से देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।

अर्घ्य: सूर्य देव को जल अर्पित करना।

कार्तिक माह के प्रमुख त्यौहार:

Kartik month : में कई महत्वपूर्ण त्यौहार आते हैं, जिनका अपना अलग महत्व है:

करवा चौथ (कार्तिक कृष्ण चतुर्थी): पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखें।

अहोई अष्टमी (कार्तिक कृष्ण अष्टमी): संतान की रक्षा के लिए व्रत करें।

धनतेरस (कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी): लक्ष्मी और धन्वंतरि की पूजा।

काली चौदश (कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी): नरक से मुक्ति के लिए दीपदान।

दिवाली (कार्तिक अमावस्या): मां लक्ष्मी और गणेश की पूजा.

नूतन वर्ष (कार्तिक शुक्ल पड़वा): नये साल की शुरुआत.

भाई बीज (कार्तिक शुक्ल द्वितीया): भाई-बहन के प्यार का त्योहार।

छठ पूजा (कार्तिक शुक्ल छठ): सूर्य देव की पूजा।

देवउठी एकादशी (कार्तिक शुक्ल एकादशी): भगवान विष्णु योग निद्रा से जागते हैं।

तुलसी विवाह (कार्तिक शुक्ल द्वादशी): तुलसी और शालिग्राम का विवाह।

कार्तिक पूर्णिमा (कार्तिक पूर्णिमा): त्रिपुरी पूर्णिमा का महात्म्य, गंगा स्नान और दीपदान।

निष्कर्ष:

Kartik month : आध्यात्मिक जागृति और पवित्रता का महीना है। इस माह में निष्ठापूर्वक व्रत, पूजा-पाठ और धर्म का पालन करने से मनुष्य के सभी कष्ट दूर होते हैं। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा से धन, समृद्धि और सुख की प्राप्ति होती है। इस माह में किए गए प्रत्येक धार्मिक कार्य से मोक्ष की प्राप्ति होती है, इसलिए सभी को इस पावन मास का लाभ उठाना चाहिए।

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