Bhagavat Gita (भागवद गीता) :गीता के चौथा अध्याय के श्लोक 23 से 33 तक का गहन विश्लेषण
यज्ञ के विभिन्न रूप: कर्म की परिणति (गीता चौथा अध्याय 23-33) Bhagavat Gita का चौथा अध्याय, ‘ज्ञानकर्मसंन्यास योग’, कर्म और ज्ञान के तालमेल पर सबसे बड़ा टेक्स्ट है। भगवान श्री कृष्ण ने श्लोक 12 से 22 में एक ज्ञानी आदमी के लक्षण और कर्म और अकर्म के गहरे रहस्य को समझाया है। अब, श्लोक 23 … Read more