प्रकाश, धन और पवित्रता का एक महान त्योहार

दिवाली सिर्फ एक त्यौहार नहीं है, बल्कि प्रकाश, नववर्ष और सकारात्मक ऊर्जा की आराधना का उत्सव है। यह पांच दिवसीय दिव्य त्योहार Dhanteras से शुरू होता है, उसके बाद Kali Chaudash या नरक चतुर्दशी आती है। इन दोनों दिनों का अपना विशेष महत्व, धार्मिक कथा और पूजा अनुष्ठान है, जो व्यक्ति के जीवन में धन, स्वास्थ्य और सुरक्षा लाते हैं।
हम इन दो शुभ दिनों के महत्व, इनसे जुड़ी पौराणिक कथाओं और गुजरात सहित पूरे भारत में मनाए जाने वाले इनके मुख्य रीति-रिवाजों के बारे में विस्तार से जानेंगे।
Dhanteras: धन, समृद्धि और स्वास्थ्य का दिन
Dhanteras, दिवाली के पाँच दिवसीय त्यौहार का पहला दिन है। यह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है, इसलिए इसे धन त्रयोदशी भी कहा जाता है। यह दिन ‘धन’ (संपत्ति) और ‘तेरस’ (तेरहवें दिन) को समर्पित है।

Dhanteras का महत्व और पौराणिक कथा
इस दिन का महत्व मुख्य रूप से तीन देवताओं की पूजा से जुड़ा है: माता लक्ष्मी, धन के देवता कुबेर और आयुर्वेद के देवता धन्वंतरि।
1. समुद्र मंथन और भगवान धनवंतरी
सबसे लोकप्रिय किंवदंती के अनुसार, भगवान धन्वंतरि कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष के तीसरे दिन समुद्र मंथन के दौरान अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए थे। इन्हें भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है और इन्हें आयुर्वेद का देवता कहा जाता है। इसलिए इस दिन उनकी पूजा करने से उत्तम स्वास्थ्य, निरोगी काया और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
2.लक्ष्मीजी और कुबेरजी की पूजा करें
Dhanterasके दिन धन की देवी लक्ष्मी की भी पूजा की जाती है। इस दिन लक्ष्मी पूजन करने से वर्ष भर घर में धन-धान्य की कमी नहीं रहती। इनके साथ ही कुबेर जी की भी पूजा की जाती है। कुबेर जी को देवताओं का कोषाध्यक्ष और धन का रक्षक माना जाता है। लक्ष्मी जी आध्यात्मिक और भौतिक धन का प्रतिनिधित्व करती हैं, जबकि कुबेर जी धन के उचित प्रबंधन और बचत के प्रतीक हैं। इसलिए दोनों की एक साथ पूजा करने से घर में धन स्थिर रहता है।
Dhanteras के मुख्य अनुष्ठान

नई खरीदारी (धातु खरीदना): इस दिन नई चीजें खरीदने का रिवाज है, विशेष रूप से सोना, चांदी, पीतल या तांबा जैसी धातुएं। ऐसा माना जाता है कि इससे घर में आशीर्वाद, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा आती है। धातुओं के अलावा, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक सामान ख़रीदना या नया व्यवसाय शुरू करना भी शुभ माना जाता है।
लक्ष्मी के चरण: घर के मुख्य द्वार पर कंकू या चावल के आटे से मां लक्ष्मी के छोटे-छोटे चरण बनाए जाते हैं, जो घर में उनके स्वागत का संकेत देते हैं।
यम दीपक जलाना: Dhanteras की शाम को यम दीपक नामक एक विशेष दीपक जलाया जाता है। यह दीपक घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर रखा जाता है। यह दीपक परिवार के सदस्यों की अकाल मृत्यु को रोकने के लिए यमराज (मृत्यु के देवता) के निमित्त जलाया जाता है।
सफाई और सजावट: चूंकि दिवाली की शुरुआत होती है, इसलिए इस दिन घरों और व्यावसायिक स्थानों की अच्छी तरह से सफाई की जाती है और रंगोली से सजाया जाता है।
पूजा का शुभ मुहूर्त (प्रदोष काल)
Dhanteras पर लक्ष्मी-कुबेर पूजा हमेशा प्रदोष काल के दौरान की जाती है, जो सूर्यास्त के बाद लगभग 2.5 घंटे तक रहता है। यह समय पूजा के लिए सबसे शुभ माना जाता है, खासकर जब यह स्थिर लग्न (वृषभ लग्न) से ओवरलैप होता है।
Kali Chaudash : नकारात्मकता का विनाश और आंतरिक शुद्धि

Kali Chaudash दिवाली के त्यौहार का दूसरा दिन है और कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। इसे नरक चतुर्दशी या छोटी दिवाली भी कहा जाता है। यह दिन मुख्य रूप से नकारात्मक ऊर्जा, भय और आलस्य को दूर करके आंतरिक शुद्धि लाने का दिन है।
Kali Chaudash का महत्व एवं पौराणिक कथा
काली चौदश को नरक चतुर्दशी कहने के पीछे दो मुख्य कहानियाँ हैं:
1.नरकासुर पर श्रीकृष्ण की विजय
सबसे लोकप्रिय किंवदंती के अनुसार, इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा की मदद से भयानक राक्षस नरकासुर का वध किया था। नरकासुर ने 16,000 स्त्रियों का अपहरण किया और देवताओं को भी परेशान किया। नरकासुर को वरदान था कि उसकी मृत्यु उसकी माता, देवी पृथ्वी के हाथों होगी। चूँकि सत्यभामा देवी पृथ्वी का अवतार थीं, इसलिए उन्होंने युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और नरकासुर का वध किया। यह विजय अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है। नरकासुर का वध करने के बाद, उन्होंने भगवान कृष्ण से अपनी मृत्यु का उत्सव मनाने का अनुरोध किया। इसलिए यह दिन नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है।
2.माँ काली और रक्तबीज की मृत्यु
पूर्वी भारत (विशेषकर बंगाल, ओडिशा और असम) में इस दिन को काली पूजा के नाम से जाना जाता है। यहां हम मानते हैं कि इस दिन मां काली ने दुष्ट राक्षस रक्तबीज का वध किया था और उसका रक्त पीकर दुनिया को उसकी पीड़ा से मुक्त किया था। माँ शक्ति का वह स्वरूप है जो काले भय, बाधाओं और नकारात्मक ऊर्जा का नाश करती है।
3.हनुमानजी की पूजा
कुछ परंपराओं में, Kali Chaudash के दिन भगवान हनुमान की भी पूजा की जाती है। हनुमान शक्ति और साहस के प्रतीक हैं। उनकी पूजा करने से भक्तों को भय पर विजय पाने और शारीरिक व मानसिक रोगों से मुक्ति पाने में मदद मिलती है।
Kali Chaudash के प्रमुख अनुष्ठान

अभयंग स्नान: इस दिन का सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र कार्य सूर्योदय से पहले अभयंग स्नान करना है। यह स्नान सुगंधित तेल, उबटन (तिल के तेल, हर्बल पाउडर, आटे और हल्दी का मिश्रण) से किया जाता है। यह शरीर और मन को भौतिक और आध्यात्मिक अशुद्धियों से मुक्त करता है। ऐसा माना जाता है कि इस स्नान से नरक से मुक्ति मिलती है।
दीपक जलाना: घर से अंधकार और नकारात्मकता को दूर करने के लिए दीपक जलाया जाता है। कई घरों में प्रवेश द्वार पर दीपक रखे जाते हैं।
नकारात्मक ऊर्जा दूर करना: नकारात्मक ऊर्जा को सोखने के लिए घर के आसपास नमक या नींबू रखने का भी रिवाज है। गुजरात में इस दिन घर में पड़ी पुरानी झाड़ू (स्वच्छता का प्रतीक) को फेंकने या बदलने का रिवाज है, क्योंकि इसे दरिद्रता और नकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।
काली पूजा: विशेष रूप से पूर्वी राज्यों में, माँ काली की पूजा मध्य रात्रि में की जाती है, जिसमें उन्हें लाल जसुद फूलों की माला चढ़ाई जाती है।
हनुमान पूजा: कुछ लोग रात में लाल या केसरिया वस्त्र पहनकर हनुमानजी की पूजा करते हैं और उनके मंत्रों का जाप करते हैं।

गुजरात में Dhanteras और Kali Chaudash : परंपरा और व्यापार का संगम
गुजरात में दिवाली का त्यौहार वाघ बरस (वासु बरस) से शुरू होता है, जिसमें गायों और बछड़ों की पूजा की जाती है। इसके बाद Dhanteras और Kali Chaudash आते हैं।
Dhanteras (गुजरात में)
चोपड़ा पूजा की तैयारी: Dhanteras के दिन व्यापारी नए साल के लिए अपना नया चोपड़ा (बहीखाता) खरीदते हैं। हालाँकि मुख्य चोपड़ा पूजा दिवाली के दिन होती है, लेकिन इसकी शुरुआत और खरीदारी इसी दिन होती है।
कारोबारी वर्ष का अंत: यह दिन गुजराती व्यापारियों के लिए पुराने वित्तीय वर्ष के अंत का भी प्रतीक है।
नई वस्तुएं और धातुएं:Dhanterasपर सोना, चांदी, बर्तन और विशेष रूप से पीतल खरीदना बेहद शुभ माना जाता है।
Kali Chaudash (गुजरात में)
सफाई और नकारात्मकता दूर करना: Kali Chaudash को दिवाली से पहले घर को पूरी तरह से साफ और पवित्र करने का दिन भी माना जाता है। यहां अभयंग स्नान भी किया जाता है।
पूजा: गुजरात में नरक चतुर्दशी के दिन माँ काली की पूजा कम देखी जाती है, लेकिन हनुमानजी की पूजा का विशेष महत्व है। लोग हनुमान मंदिरों में दर्शन के लिए जाते हैं।
रात्रि दीपक: गुजरात में Kali Chaudash की रात को भी घर के बाहर दीपक जलाए जाते हैं।
Dhanteras एवं Kali Chaudash: एक आंतरिक संदेश

ये दोनों त्यौहार हमें एक महत्वपूर्ण संदेश देते हैं:
Dhanteras हमें सिखाता है कि केवल धन अर्जित करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य (धनवंतरी), उचित प्रबंधन (कुबेर) और समृद्धि (लक्ष्मी) का संयोजन जीवन में वास्तविक खुशी लाता है।
Kali Chaudash हमें याद दिलाता है कि जीवन में आगे बढ़ने से पहले, हमें अपने मन और आत्मा में मौजूद आंतरिक राक्षसों जैसे आलस्य, भय, ईर्ष्या और नकारात्मकता को नष्ट करने की आवश्यकता है।
ये दोनों दिन भौतिक संपदा और आध्यात्मिक शुद्धि के बीच संतुलन बनाए रखने के महत्व को दर्शाते हैं। आइए, हम भी दीप जलाएँ, देवताओं की पूजा करें और आने वाले नए साल के लिए धन, सुख और शांति का आशीर्वाद प्राप्त करें।
आप सभी को Dhanteras एवं Kali Chaudash की हार्दिक शुभकामनाएँ!