Tulsi Vivah (तुलसी विवाह) 2025 : भगवान विष्णु और तुलसी के पवित्र विवाह का महत्व।

Tulsi Vivah (तुलसी विवाह) 2025 : तुलसी विवाह हिंदू धर्म का एक बहुत ही पवित्र और शुभ त्योहार है। यह देवउठा एकादशी के दूसरे दिन, यानी कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की द्वादशी को मनाया जाता है। यह त्योहार भगवान विष्णु के एक रूप शालिग्राम और पवित्र पौधे तुलसी के प्रतीकात्मक विवाह का प्रतीक है। तुलसी विवाह सिर्फ़ एक धार्मिक समारोह नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति के प्रति सम्मान और भक्ति का भी प्रतीक है। यह शक्ति और सुखी वैवाहिक जीवन के आदर्शों का प्रतीक है।

Tulsi Vivah (तुलसी विवाह) 2025 : इस विवाह के बाद ही हिंदू धर्म में सभी शुभ और मांगलिक काम आखिरी चार महीनों (चातुर्मास) के लिए बंद हो जाते हैं। शादी, गृहप्रवेश वगैरह जैसे काम शुरू हो जाते हैं। इसलिए, तुलसी विवाह को शुभ कामों की शुरुआत का शुरुआती पॉइंट माना जाता है।

1.तुलसी विवाह का परिचय और महत्व

Tulsi Vivah (तुलसी विवाह) 2025 : कार्तिक महीने में आने वाला एक शुभ काम है, जिसे भगवान विष्णु अपने चार महीनों के दौरान मनाते हैं। योग निद्रा से जागते हैं और एक बार फिर पूरी सृष्टि में शुभ कामों की शुरुआत की घोषणा करते हैं।

तुलसी विवाह क्या है?

तुलसी विवाह का मतलब है पवित्र तुलसी का पौधा (जिसे देवी वृंदा का रूप माना जाता है) और शालिग्राम (जिसे भगवान विष्णु का प्रतीक माना जाता है) का सिंबॉलिक विवाह। इस रस्म को हिंदू धर्म में कन्यादान जितना ही पुण्य माना जाता है। यह त्योहार देवउठनी एकादशी (प्रबोधिनी एकादशी) यानी कार्तिक शुक्ल पक्ष के दूसरे दिन मनाया जाता है। यह द्वादशी के दिन मनाया जाता है।

त्योहार का महत्व

शुभ कामों की शुरुआत: हिंदू धर्म में चातुर्मास (चार महीने) के दौरान शादी, मुंडन, गृहप्रवेश आदि सभी शुभ काम बंद रहते हैं। यह चातुर्मास तुलसी विवाह के साथ खत्म होता है और शादियों का मौसम फिर से शुरू हो जाता है।

प्रकृति का सम्मान: यह त्योहार भारतीय संस्कृति में प्रकृति के महत्व को दिखाता है। घर में तुलसी रखना और उसकी पूजा करना न केवल धार्मिक है बल्कि वैज्ञानिक भी है और स्वास्थ्य लाभ भी मिलते हैं।

मोक्ष की प्राप्ति: ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति तुलसी विवाह करवाता है, उसे और उसके परिवार को मोक्ष मिलता है और वैकुंठ धाम में स्थान मिलता है।

2.पौराणिक कहानी: वृंदा और जालंधर

Tulsi Vivah (तुलसी विवाह) 2025 : के पीछे एक बहुत ही दिलचस्प और दुखद पौराणिक कहानी है, जो वृंदा और राक्षस जालंधर की कहानी से जुड़ी है।

जालंधर की उत्पत्ति और शक्ति

जालंधर एक शक्तिशाली राक्षस था, जो समुद्र से पैदा हुआ था। जालंधर की शादी वृंदा नाम की एक सुंदर और बेहद पतिव्रता महिला से हुई थी। वृंदा को अपने पति से बहुत प्यार और अटूट भक्ति थी। अपने दानवीरता और पतिव्रता होने के कारण, जालंधर को कोई भी देवता या इंसान हरा नहीं सकता था।

देवताओं का संकट

अपनी अदम्य शक्ति से घमंडी होकर, जालंधर ने देवताओं और इंसानों पर अत्याचार करना शुरू कर दिया। जब देवता उसे हरा नहीं पाए, तो उन्होंने सुरक्षा के लिए भगवान विष्णु की ओर रुख किया। देवताओं को बचाने के लिए, भगवान विष्णु ने एक जटिल रणनीति का सहारा लिया।

भगवान विष्णु का धोखा

भगवान विष्णु ने जालंधर का रूप धारण किया और वृंदा के महल में घुस गए। जब वृंदा ने भगवान विष्णु को अपने पति के रूप में देखा तो उन्हें ही असली जालंधर मान लिया। इससे उसका सतीत्व धर्म टूट गया। जैसे ही वृंदा का सतीत्व टूटा, भगवान शिव ने युद्ध में जालंधर को मार डाला।

वृंदा का श्राप और तुलसी का वरदान

जब वृंदा को सच पता चला कि उसके साथ धोखा हुआ है, तो वह क्रोधित हो गई और उसने भगवान विष्णु को शालिग्राम को पत्थर का श्राप दे दिया। शालिग्राम पत्थर के हो गए और खुद आग में जलकर भस्म हो गए। भगवान विष्णु को अपने किए पर पछतावा हुआ और उन्होंने वृंदा के शरीर की राख से एक पौधा उगाया, जिसका नाम उन्होंने तुलसी (अतुलनीय) रखा।

भगवान विष्णु ने तुलसी को वरदान दिया कि – “मैं अपने शालिग्राम रूप में तुलसी के पत्तों के बिना दुख सहूंगा।” स्वीकार नहीं। तुम्हारे बिना मेरी पूजा अधूरी रहेगी और हर साल कार्तिक द्वादशी के दिन मैं तुम्हारे साथ रहूंगा। मैं शादी करके अपनी गलती का प्रायश्चित करूँगा।”

तभी से इस सिंबॉलिक शादी की परंपरा शुरू हुई, जो तुलसी की बलि और भगवान विष्णु की पूजा पर आधारित थी। आशीर्वाद दिखाता है।

3.तुलसी विवाह पूजा विधि

Tulsi Vivah (तुलसी विवाह) 2025 : की रस्म किसी भी आम हिंदू शादी की तरह ही होती है, जिसमें रस्में, सजावट और धार्मिक रस्में शामिल हैं। रस्मों का पालन किया जाता है।

1.शादी की तैयारियाँ

मंडप की सजावट: घर के आंगन में या तुलसी की क्यारी के चारों ओर एक सुंदर मंडप बनाया जाता है। क्यारा को गेरू, चूने और रंगोली से सजाया जाता है।

कन्या (तुलसी) की सजावट: तुलसी के पौधे को लाल या पीली चुंदरी, ओढ़नी, एकमात्र सजावट, चूड़ी और हार से सजाया जाता है। उस पर हलदर और कंकू लगाया जाता है।

दूल्हे (शालिग्राम) की सजावट: शालिग्राम पत्थर को नए कपड़े पहनाए जाते हैं, माला पहनाई जाती है और सुंदर बनाया जाता है। इस तरह सजाया जाता है।

शादी का सामान: शादी का सारा सामान (शेरदीनो मंडप, हलदर, कंकू, चावल, कपड़े, फल, मिठाई, दीवा और दूसरी पूजा की सामग्री) इकट्ठा किया जाता है।

2.समारोह और विवाह समारोह

गणेश पूजा और संकल्प: रस्म गणेश पूजा से शुरू होती है, उसके बाद शादी का संकल्प लिया जाता है।

गंगा जल से स्नान: तुलसी और शालिग्राम को पवित्र गंगा जल से स्नान कराया जाता है।

दूल्हे का आगमन: तुलसी शालिग्रामजी को क्यारा में लाने के लिए आते हैं।

अंतरपात: तुलसी और शालिग्राम के बीच एक सफेद कपड़ा (अंतरपात) रखकर मंगलाष्टक गाया जाता है।

कन्यादान: तुलसी को “बेटी” मानकर और उसके माता-पिता (जो इस विवाह का आयोजन करते हैं) द्वारा कन्यादान की रस्म की जाती है। यह रस्म सबसे पवित्र और फलदायी मानी जाती है।

चार फेरे: शालिग्रामजी को लेकर तुलसी क्यारा के चारों ओर चार परिक्रमा की जाती है, जिसका उपयोग विवाह के लिए किया जाता है। यह घूमने का प्रतीक है।

सिंदूर और माला: तुलसी को सिंदूर चढ़ाया जाता है और तुलसी और शालिग्राम को माला चढ़ाई जाती है। पहनाई जाती है।

आरती और प्रसाद: समारोह के अंत में, आरती की जाती है और तुलसी, विशेष रूप से शक्करियां, आंवला और शेरडी का प्रसाद चढ़ाया जाता है। यह प्रसाद सभी को बांटा जाता है।

4.धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व

Tulsi Vivah (तुलसी विवाह) 2025 : का त्योहार सिर्फ़ आस्था तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसकी गहरी धार्मिक और वैज्ञानिक जड़ें भी हैं। इसके फ़ायदे भी हैं।

धार्मिक महत्व

लक्ष्मी का रूप: तुलसी को देवी लक्ष्मी का रूप माना जाता है। तुलसी से विवाह करने से घर में सुख-समृद्धि और धन की कमी नहीं होती।

दोष निवारण: जिस दंपत्ति के संतान नहीं है या जिनकी बेटी नहीं है, वे तुलसी विवाह करवाकर कन्यादान कर सकते हैं। पुण्य मिलता है, जिससे मोक्ष मिलता है।

पति-पत्नी के बीच संबंध: यह पूजा करने से पति-पत्नी के संबंधों में मिठास आती है और शादीशुदा ज़िंदगी खुशहाल बनती है।

विष्णु भक्ति: इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना और व्रत रखना भगवान विष्णु का अनोखा आशीर्वाद है। भक्ति दिखाता है।

वैज्ञानिक और औषधीय महत्व

हवा को शुद्ध करना: तुलसी का पौधा 24 घंटे ऑक्सीजन छोड़ता है। और हवा को शुद्ध करता है, खासकर कार्तिक महीने में बदलते माहौल में यह बहुत फ़ायदेमंद है।

इम्यूनिटी: तुलसी के पत्तों में एंटी-ऑक्सीडेंट और दूसरे औषधीय गुण होते हैं, जो शरीर की रक्षा करते हैं। इम्यूनिटी बढ़ती है और सर्दी-जुकाम और पेचिश जैसी बीमारियों से बचाव होता है।

कीटनाशक: तुलसी के पौधे की खुशबू मच्छरों और दूसरे नुकसानदायक कीड़ों को घर में आने से रोकती है, जो सेहत के लिए ज़रूरी है।

समय का महत्व: नवंबर की शुरुआत में सर्दी शुरू हो जाती है, जब तुलसी की पूजा की जाती है और इसका इस्तेमाल सेहत बनाए रखने का एक पारंपरिक तरीका है।

5.तुलसी विवाह उत्सव (पूरे क्षेत्र में उत्सव)

Tulsi Vivah (तुलसी विवाह) 2025 : भारत के अलग-अलग इलाकों में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन इसके रीति-रिवाजों में थोड़ा फ़र्क देखा जाता है।

गुजरात और महाराष्ट्र में

शादी जैसा माहौल: गुजरात में तुलसी विवाह को बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। इसे एक त्योहार की तरह मनाया जाता है। कई लोग घर पर ही लकड़ी का मंडप बनाते हैं और पूजा ऐसे करते हैं जैसे उनकी बेटी की शादी हो।

तुलसी क्यारा का महत्व: घर में तुलसी क्यारा होना शुभ माना जाता है और इस दिन क्यारा मनाया जाता है। सुंदर लाइटिंग और फूलों से सजाया जाता है।

शादी के गीत: महिलाएं शादी के गीत (फतना) गाती हैं और भगवान विष्णु को अपनी शादी के लिए बुलाती हैं।

उत्तर भारत (खासकर वाराणसी)

कार्तिक स्नान: उत्तर भारत में यह त्योहार कार्तिक स्नान से जुड़ा होता है। भक्त गंगा या दूसरी पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और तुलसी और शालिग्राम की पूजा करते हैं।

सांस्कृतिक कार्यक्रम: कई मंदिरों में रासलीला और भजन-कीर्तन जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं।

6.निष्कर्ष: भक्ति और आस्था का संदेश

Tulsi Vivah (तुलसी विवाह) 2025 : उत्सव सिर्फ़ एक धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति के प्रेम, समर्पण का प्रतीक है। और पवित्रता की भावना को उजागर करता है।

शुभकामनाओं की शुरुआत: यह त्योहार चातुर्मास के खत्म होने और सभी शुभ कामों की शुरुआत का प्रतीक है। यह जीवन में खुशी और समृद्धि का स्वागत करता है।

संस्कृति से जुड़ाव: तुलसी विवाह हमें हमारी जड़ों, पौराणिक कथाओं और पर्यावरण से जोड़ता है। રાખે છે. यह हमें सिखाता है कि प्रकृति का एक छोटा सा पत्ता भी हमारे जीवन में कितना बड़ा महत्व रख सकता है।

भक्तिनो विजय: वृंदानी की कहानी दिखाती है कि जीवन में चाहे कितने भी दुख और मुश्किलें क्यों न आएं, आस्था और भक्ति आखिरकार विजयी होती है और ईश्वर का आशीर्वाद मिलता है।

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